'मैं वापस आऊंगा' इम्तियाज़ अली की एक दिल को छू लेने वाली, इमोशनल पीरियड ड्रामा फ़िल्म है। यह फ़िल्म प्यार, यादों और 1947 के बंटवारे से जुड़े पीढ़ियों के दर्द को दिखाती है।
यह फ़िल्म 12 जून, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई और इसकी इमोशनल कहानी और बेहतरीन संगीत के लिए इसे खूब तारीफ़ मिली।
यह फिल्म एक 95 साल के हुजूर व्यक्ति की कहानी है जिसका 78 साल का प्यारा अधूरा रह गया है वह अपने प्यार से किया गया वादे को पूरा करना चाहता है।
इस फ़िल्म में इम्तियाज़ अली डायरेक्ट है और इसमें दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह, वेदांग रैना और शरवरी ने काम किया है।
वर्तमान में,नसीरुद्दीन शाह : कीनू
दिलजीत दोसांझ :निर्वैर
शर्वरी वाघ :जिया
युवा कीनू :वेदांग रैना
कहानी
वर्तमान में, कीनू नाम के 95 साल के बुज़ुर्ग बहुत बीमार हैं और स्ट्रोक के बाद मौत के करीब हैं। बेहोशी की हालत में, वह सरगोधा (जो अब पाकिस्तान में है) में अपने पुश्तैनी घर लौटने की बातें बुदबुदाते हैं और बंटवारे के समय अपने खोए हुए प्यार से किए गए वादे को दोहराते हैं:
"मैं वापस आऊंगा"। यूके में रहने वाला उनका पोता निर्वैर उनकी देखभाल करता है और परिवार के 78 साल पुराने दबे हुए राज़ को समझने की कोशिश करता है। फ़्लैशबैक में युवा कीनू और जिया के प्यार और फिर रैडक्लिफ़ लाइन की वजह से उनके हिंसक अलगाव को दिखाया गया है।
इनका 78 साल का प्यार अधूरा रह गया था और उन्होंने उससे वादा किया था कि मैं वापस आऊंगा।निर्वैर फैसला करता है कि वाह खुद पाकिस्तान जाएगा जिया से मिलेंगे अपने दादाजी से उसकी बात करवाएंगे निवैर पाकिस्तान पाहुंच जाता है
और तभी उसे पता चलता है कि उसके दादाजी की तबीयत ज्यादा खराब हो जाती है कब वाह वीडियो कॉल करके अपने दादाजी को सरगोधा दिखता है फिर निवैर आखिरकर जिया के घर पहुंच जाता है वहां पता चलता है कि जिया की 10 साल पहले मौत हो चुकी है
यह सुनकर दूसरों को काफी बुरा लगता है, एफआईआर है, अपने दादाजी को यह बात बताने वाला होता है तभी उसके दादाजी जिया के पीछे फोटो देखते हैं और समझते हैं कि वह जिया खड़ी है निर्वैर के पीछे और उससे बात करने लगते हैं।
फैन्स फिल्म को बहुत ही पसंद कर रहे हैं कि ये सच्ची प्रेम कहानी और इमोशनल भरा हुआ है दर्शकों का ये मनाना है की नसीरुद्दीन शाह ने फ़िल्म को अपने दम पर संभाला है।
उन्होंने कमज़ोर होते दिमाग के कन्फ्यूज़न और हमेशा रहने वाली तड़प के दर्द को बहुत ही शानदार ढंग से दिखाया है।इस फिल्म के कलाकारों ने अपने किरदारों को बहुत ही अच्छे से निभाया है इसकी वजह से यार दोस्तों लोगों को बहुत ज्यादा पसंद आ रही है।
ए.आर. रहमान का संगीत: दिल को छू लेने वाला बैकग्राउंड स्कोर और गाने फ़िल्म के इमोशनल माहौल को और बेहतर बनाते हैं।
फ़िल्म कहाँ कमज़ोर पड़ जाती है:
दर्शकों का कहना है कि लगभग 167 मिनट की फिल्म का पहला हाफ काफी धीमा चलता है, जिससे दुख भरी कहानी ज़रूरत से ज़्यादा लंबी लगती है।
एक्टर्स वेदांग रैना और शर्वरी वाघ के बीच की मुख्य रोमांटिक केमिस्ट्री कमज़ोर लगी। आलोचकों को लगा कि उनकी केमिस्ट्री में वह जोश और इमोशनल गहराई नहीं थी।
यह फिल्म इंसानियत को एक शानदार और कलात्मक श्रद्धांजलि है। धीमी गति और कास्टिंग की कुछ कमियों के बावजूद, यह एक यादगार और प्रायश्चित की कहानी के तौर पर बेहतरीन काम करती है।
अगर आप इम्तियाज़ अली के खास, दिल को छू लेने वाले अंदाज़ और काव्यात्मक कहानी कहने के तरीके के प्रशंसक हैं, तो यह फिल्म आपको बहुत भावुक कर देगी।
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